Tuesday, 25 November 2014

जय श्री गणेशाय नमः 
 गणेश जी की आरती
जय गणेश, जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।
लड्ï्ïडुअन को भोग लगे
सन्त करें सेवा।
एक दन्त दयावन्त चार भुजाधारी।।
मस्तक सिन्दूर सोहे
मूसे की सवारी॥  जय.
अंधन को आँख देत
कोढिऩ को काया।
बांझन को पुत्र देत
निर्धन को माया ॥ जय.
हार चढ़े फूल चढ़े
 और चढ़े मेवा ।
सब काम सिद्घ करें
श्रीगणेश देवा ॥ जय.
जय गणेश देवा
प्रभु जय गणेश देवा,
विघ्न विनाशक स्वामी
सुख सम्पत्ति देवा,
पार्वती के पुत्र कहावो
शंकर सुत स्वामी,
गजानन्द गणनायक
शंकर सुत स्वामी॥ जय।।

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